Trending

#WorldToiletDay क्या आज भी हर घर में टॉयलेट हैं !

#WorldToiletDay क्या आज भी हर घर में टॉयलेट हैं ! November 19, 2019Leave a comment

अजीब लगता है सुनने और पढ़ने में यह सब लेकिन आज अगर देश के देहातों में जाकर प्रत्यक्ष समझा जाए तो अक्षय कुमार की ” टाॅयलेट एक प्रेम कथा” उचित ही नहीं अक्षरत: सच साबित होती है। देश में शादियों का सीज़न जोरों पर हैं और हम लगभग रोज़ ही समाचार पत्रों में इस बारे में जानकारी लेते हैं कि रिश्ता जोड़ने के लिए शर्त ” शौचालय” थी अथवा किसी नई बहू ने ससुराल में रहने से सिर्फ इसलिए मना कर दिया कि वहां ” शौचालय” नहीं था।


कुछ मामलों में तो आपसी समर्पण विवाहितों में ऐसा भी देखा गया है जहां कि करवाचौथ का उपहार ही इज्ज़त घर यानि शौचालय के रूप में दे कर अनुकरणीय उदाहरण पेश किया गया हो।
PM मोदी की इस मोहिम के मायने दूरगामी हैं क्योंकि चाहे स्मार्ट सिटी हो अथवा नया भारत, जब तक शौचालय जैसी मूलभूत आवश्यकता की ज़रूरत को पूरी तरह सम्पन्न नहीं करवाया जाएगा तब तक न तो हम स्मार्ट कहलाए जा सकते न ही नई सोच वाले।


इस लेख के शुरवाती शब्दों की आवश्यकता को आज से करीब 30-40 पहले ही पूरा कर लेना चाहिए था लेकिन यह प्रकृति प्रेमी देश और विशेषकर इस देश का देहात तो ” खुले” का आदी और प्रेमी रहा है और इसी को अपनी सभ्यता और संस्कृति मानता रहा है।
वक्त बदल चुका है और गंभीर मंथन इस बारे में हो जाने के बाद आज देश में जिस प्रकार इस सोच को बदलकर ” इज्ज़त घर” को इज्जत और सम्मान का पहला स्वरूप माना जा रहा है वो इस नये भारत की कल्पना की दिशा में सबसे पहला ” कंक्रीट कदम” है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *