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‘साइकोथेरेपी’ क्या है, और इसका उपयोग क्यों किया जाता है !

‘साइकोथेरेपी’ क्या है, और इसका उपयोग क्यों किया जाता है ! May 18, 2020Leave a comment

साइकोथेरेपी या मनोचिकित्सा मनोवैज्ञानिक उपचार का तरीका है जिनका प्रयोग मानसिक समस्याओं से उबरने हेतु मनोवैज्ञानिक करते हैं. यह व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों उसके भावनात्मक बदलाव और विभिन्न मानसिक रोगों के इलाज़ का तरीका है. साइकोथेरेपी का उद्देश्य मानसिक उलझनों से ग्रस्त व्यक्ति को उसे खुद उसकी भावनाओं को समझ सकने में काबिल बनाना. उसके मानसिक समस्याओं में होने का कारण ढूढ़ना या उसकी वजहें पता करना और उसका हल ढूढ़ना होता है.

इसमें क्लाइंट और थेरेपिस्ट के बीच समयबद्ध सत्रों के सञ्चालन से समस्याओं का इलाज किया जाता है. जिसमे क्लाइंट एवं थेरेपिस्ट के मध्य भरोसे का सम्बन्ध होना आवश्यक माना गया है. साइकोथेरेपी में सत्रों की संख्या एवं इलाज़ की अवधि तात्कालिक एवं दीर्घकालीन समस्याओं की गंभीरता के आधार पर होती है. यह क्लाइंट और थेरेपिस्ट दोनों आपस में तय करते है. क्लाइंट की गोपनीयता की बुनियादी शर्त होती है और क्लाइंट तथा थेरेपिस्ट के बीच प्रोफेसनल सम्बन्ध होना चाहिए. थेरेपिस्ट को हमेशा तटस्थ रहना होता है.


इसमें जो क्लाइंट अनुशाशन एवं प्रतिबद्धता से निर्देशों का पालन करते है उन्हें अवश्य लाभ होता है . साइकोथेरेपी कई तरह की मानसिक समस्याओं में प्रयोग लाई जाती है और इसका लाभ भी होता है जैसे डिप्रेशन , चिंता, विषाद, नशे की लत होना, गुस्सा आदि, जिसमे कोई व्यक्ति यदि इन समस्याओं से मुक्त होना चाहता है तो उसे इससे मदद मिल सकती है. साइकोथेरेपी की कई प्रचलित प्रविधियां है जिनके जरिये थेरेपिस्ट क्लाइंट के मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों को सुलझाने में सहयोग करते है जैसे व्यवहार चिकित्सा थेरेपी, अंतर्व्यक्तिक चिकित्सा थेरेपी, संज्ञानात्मक चिकित्सा, फैमिली थेरेपी, ग्रुप थेरेपी, साईकोडायनामिक थेरेपी आदि. विभिन्न तरह के अध्ययन यह बताते है की इनका लाभ प्रभावित व्यक्तिओं पर पड़ता है और उन्हें परेशानियों से राहत मिलती है , उनका समायोजन बेहतर होता है. भावनाओं और व्यवहार में सुधार होने के साथ दिमाग और शरीर में सकारात्मक परिवर्तन भी होते है.

वर्तमान दौर में हमारे बीच ढेरों ऐसे व्यक्ति होते है जो न जाने कितनी मानसिक चुनौतियों के साथ जीते है और इसके इलाज़ को प्राथमिकता में नहीं लेते है, जिसके कारण उन्हें समायोजन सम्बन्धी समस्याओं का सामना करना पड़ता है , साइकोथेरेपी उन्हें इनसे निकलने में सहायक हो सकती है. ये प्रविधियां प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिकों द्वारा ही की जानी चाहिए कोई भी व्यक्ति इन्हे नहीं कर सकता है.