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उल्का पिंड टकराने से ‘लोनार झील’ का पानी हुआ ‘लाल,’ क्या ये किसी खतरे का संकेत है?

उल्का पिंड से बनी 'लोनार झील' का पानी अचानक हुआ 'लाल,' वैज्ञानिक भी हैरान!

उल्का पिंड टकराने से ‘लोनार झील’ का पानी हुआ ‘लाल,’ क्या ये किसी खतरे का संकेत है? June 12, 2020Leave a comment

हजारों साल पहले आसमान से उल्का पिण्ड गिरा था। उल्का पिण्ड का जमीन पर टकराना किसी परमाणु बम गिरने जैसे ही शक्तिशाली होता है। उल्कापिण्ड गिरने के कारण महाराष्ट्र के लोनार में इतना बड़ा गढा हुआ कि उसमें झील बन गयी ।

मुंबई से 500 किलोमीटर दूर बुलढाणा जिले में स्थित यह झील पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। जिसका निर्माण करीब 50,000 साल पहले धरती से विशालकाय उल्कापिंड के टकराने से हुआ था। तब से दुनियाभर के वैज्ञानिकों के लिए यह झील कौतूहल का केंद्र बना हुआ है।
लोनार झील संरक्षण एवं विकास समिति के सदस्य गजानन खराट का इस विषय पर कहना है कि झील का पानी खारा है और इसका पीएच स्तर 10.5 है। पानी के रंग बदलने की वजह लवणता और शैवाल हो सकते हैं। इसके साथ ही पानी की सतह से एक मीटर नीचे ऑक्सीजन नहीं है। इसी तरह ईरान का भी एक झील का पानी, खारेपन के कारण लाल रंग का हो गया था।

उनका कहना है कि बारिश नहीं होने से लोनार झील में ताजा पानी नहीं भरा है जिससे जल का स्तर अभी कम है। जलस्तर कम होने के कारण खारापन बढ़ जाता है जिसके कारण शैवाल की प्रकृति भी बदलती है और रंग भी बदलने की सम्भावना है।
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के प्रमुख डॉ. मदन सूर्यवंशी का भी कहना है कि जिस बड़े पैमाने पर पानी का रंग बदला है उसे देखते हुए ये कहा जा सकता है कि इसमें किसी मानवीय दखल का मामला नहीं है।

साथ ही उन्होंने कहा कि पानी में मौसम के मुताबिक बदलाव आता है और सम्भव है कि लोनार झील में भी मामला यही हो सकता है। वहां जा कर ही झील में आये बदलाव की जांच हो पाएगी तभी इसके बारे में ज्यादा कुछ बता सकेंगे।
पहले भी इस झील का पानी रंग बदल चुका है। तब वैज्ञानिकों ने रंग बदलने की गुथी को सुलझा लिया था।परंतु कल जब इस झील के पानी ने रंग बदला उसके बाद से अभी तक कोई भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है।